Tuesday, August 09, 2011

मैं कौन हूँ..


मेरे होने से तो कुछ ख़ास फ़र्क़ नहीं
न होने से भी कुछ बदलता नहीं
फिर मेरा होना क्या है, क्यों है
जब मैं खुद नहीं जानता तो क्यों
हर वक़्त मुझीसे पूछा जाता है
के तुम कौन हो.

मैंने नहीं चुना था मेरा पैदा होना
किसी क़ुसूर का मेरे हाथों होना भी मुझे याद नहीं आता
के जिसकी सज़ा में जीना सुनाया गया हो
मेरे शौक के खिलाफ़ की पैदाइश के बाद
मुहर थापी गयी किसी मज़हब की मेरे माथे पर
और सिखायी गयी नफ़रतें दूसरे मज़हबों के लिए
कोशिशें की गयी मेरे ज़ेहन को ग़ुलाम बनाने की
ताकि मैं वैसे न सोच सकूँ
जैसे मैं सोचना चाहता हूँ

मुझको बनाया चितकबरी चमड़ियों में
और लड़ने के लिए छोड़ दिया
मेरे हाथों उसूल बनवाए गए
फिर मेरे ही हाथों तुड़वाये गए
मेरे रोने को बुज़दिली और
और मेरे पलटवार को पौरुष कहा गया
और लाशों के ढेर पे बने महलों को
तहज़ीब कहा गया

ये तो मैं था के कभी कभी
चुरा लेता था अपने आप को
दोस्ती और मोहब्बत के आग़ाज़ 
मैं ही लाया था
लेकिन ये सब बड़े घाव पर 
छोटे मलहम जैसा था 
मेरी तमाम कोशिशें शिकार हो गयी
उस साज़िश की जो अज़ल से की जा रही है

गर तू फिर भी ख़ुदा है
तो मुझे हक़ दे सवाल पूछने का
बता के मैं कौन हूँ....

                                                                                 हिमांशु सोनी 

5 comments:

  1. kya baat hai bhai.... really awesome... :)

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  2. there is no word for dis just mis u lot.....what a phylosophy about life!!!
    M just loving it realy yar............
    "Duriya manjur to nahi hoti lekin
    Dur kar dete hai majbur daur....."
    Lekin ab to ye duriya bhi mit gayi hai....
    Thax to being my FRND......

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  3. Great Bro......
    really good yaar
    keep posting

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  4. Himanshu Soni!!! Add me in your Fan list !:)
    Keep up the work..n keep writing n posting!:)

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