अब तो ये हो के रास्ता मिल जाए कोई
ख़ुदा न तो रहनुमा मिल जाए कोई
समंदर में भटकती कश्तियों को
ख़ुदा करे अब किनारा मिल जाए को ई
बहुत तलाशी मुहब्बत इन शहरों में
अब तो ये हो के सेहरा मिल जाए कोई
ज़िन्दगी मुझे शिकायत तो नहीं तुझसे
पर बहुत हुआ क़ज़ा मिल जाए कोई
हिमांशु
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